पूर्व उपाध्यक्ष फूलपुर विधानसभा क्षेत्र ब्लाक बहरिया शिव शंकर ने बाबा साहब को 129 वे श्रद्धांजलि
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की 129 वी जयंती को लेकर अधिक आपदा की घड़ी में वर्तमान दौर के कोरोनावायरस के भयावह स्थिति विकासखंड बहारिया के शिव शंकर पासी भोले भैया पूर्व उपाध्यक्ष फूलपुर विधानसभा क्षेत्र ब्लाक बहरिया प्रयागराज की ओर से बड़े ही हर्षोल्लास के साथ अंबेडकर साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए और दीपक जलाकर उन्हें शत-शत नमन किया गया साथ ही उनके जीवन के बारे में भी जहां लाख डाउन के नियमों एवं आदेशों का पालन करते हुएप्रकाश डाला गया है बताया जाता है कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल सन 1891 ईसवी में मध्यप्रदेश के महू गांव में हुआ था इनके पिता जी का नाम राम जी माताजी का सतपाल व माता जी का नाम भीमाबाई था जहां इनकी पहली शादी 19063 में रमाबाई के साथ हुई थी उनकी मृत्यु हो जाने के बाद 1948 ईस्वी में एक ब्राह्मण परिवार के व्यक्ति के साथ हुई बता दें कि अंबेडकर साहब को शुरू से ही सामाजिक असमानता को लेकर महिलाओं श्रमिकों किसानों एवं दलितों के प्रति सकारात्मक सोच रही जिसके परीक्षा में इनका पूरा जीवन संकल्प रहा कि सामाजिक भेदभाव को खत्म करना है जिसके लिए इन्होंने अपना एक लक्ष्य निर्धारित करके सामाजिक असमानता दूर करके दलितों के मानवाधिकार को प्रतिष्ठा करके परंतु सामाजिक भेदभाव होने के कारण उन्हें लोग एक दृष्टि से देखते थे लेकिन उनकी प्रतिभा एवं मेधावी पर देखकर बड़ौदा के बहराइच संभाजीराव गायकवाड ने छात्रवृत्ति देखकर सन 1913 में उच्च शिक्षा के लिए विदेश दिया गया जहां उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय लंदन स्कूल आफ इवने नामइकज में अर्थशास्त्र में डायरेक्टेड की उपाधि प्राप्त की तत्पश्चात वापस आने पर दलितों के समर्थन में एक अभियान का नेतृत्व किया गया साथ ही भारतीय गरीबों के लिए उनके तमाम महत्वपूर्ण योगदान के लिए बिगुल बजाया गया उसके बाद राजनीति में शामिल हो गए जहां उन्होंने देश के पहले कानून व न्याय मंत्री रहे जहां उन्होंने भारत के संविधान को 2 साल 11 महीना 18 दिन के बाद से विधान बनकर तैयार हुआ जहां संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को जैसा संविधान अपनाया जिससे संविधान की रचना के लिए उन्होंने अपना अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई डॉक्टर अंबेडकर साहब का मुख्य उद्देश्य की शिक्षा और आवश्यकताओं को फैलाना सामाजिक आंदोलन में देश में जातिवाद को समाप्त करना जिससे उन्हें दलितों महिलाओं के लिए कुछ लोगों का मसीहा के रूप में देखा जाता है जहां उनके व्यक्ति में स्वरों शब्द की प्रखरता बुद्धिमान जानवर स्वादिष्ट भव्य जिससे पूरे दुनिया में उन्हें उच्च नजर किया जाता है जहां लंबी व कारण बाबा साहेब की मृत्यु 6 दिसंबर 1956 दिल्ली में है बावजूद देश के अतुलनीय सेवाओं के लिए वर्ष 1990 में भारत से सम्मानित किया गया श्रद्धांजलि अर्पित करने में शिव शंकर एवं उनका पूरा परिवार मौजूद रहे।पूर्व उपाध्यक्ष फूलपुर विधानसभा क्षेत्र ब्लाक बहरिया शिव शंकर ने बाबा साहब को 129 वे श्रद्धांजलि
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की 129 वी जयंती को लेकर अधिक आपदा की घड़ी में वर्तमान दौर के कोरोनावायरस के भयावह स्थिति विकासखंड बहारिया के शिव शंकर पासी भोले भैया पूर्व उपाध्यक्ष फूलपुर विधानसभा क्षेत्र ब्लाक बहरिया प्रयागराज की ओर से बड़े ही हर्षोल्लास के साथ अंबेडकर साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए और दीपक जलाकर उन्हें शत-शत नमन किया गया साथ ही उनके जीवन के बारे में भी जहां लाख डाउन के नियमों एवं आदेशों का पालन करते हुएप्रकाश डाला गया है बताया जाता है कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल सन 1891 ईसवी में मध्यप्रदेश के महू गांव में हुआ था इनके पिता जी का नाम राम जी माताजी का सतपाल व माता जी का नाम भीमाबाई था जहां इनकी पहली शादी 19063 में रमाबाई के साथ हुई थी उनकी मृत्यु हो जाने के बाद 1948 ईस्वी में एक ब्राह्मण परिवार के व्यक्ति के साथ हुई बता दें कि अंबेडकर साहब को शुरू से ही सामाजिक असमानता को लेकर महिलाओं श्रमिकों किसानों एवं दलितों के प्रति सकारात्मक सोच रही जिसके परीक्षा में इनका पूरा जीवन संकल्प रहा कि सामाजिक भेदभाव को खत्म करना है जिसके लिए इन्होंने अपना एक लक्ष्य निर्धारित करके सामाजिक असमानता दूर करके दलितों के मानवाधिकार को प्रतिष्ठा करके परंतु सामाजिक भेदभाव होने के कारण उन्हें लोग एक दृष्टि से देखते थे लेकिन उनकी प्रतिभा एवं मेधावी पर देखकर बड़ौदा के बहराइच संभाजीराव गायकवाड ने छात्रवृत्ति देखकर सन 1913 में उच्च शिक्षा के लिए विदेश दिया गया जहां उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय लंदन स्कूल आफ इवने नामइकज में अर्थशास्त्र में डायरेक्टेड की उपाधि प्राप्त की तत्पश्चात वापस आने पर दलितों के समर्थन में एक अभियान का नेतृत्व किया गया साथ ही भारतीय गरीबों के लिए उनके तमाम महत्वपूर्ण योगदान के लिए बिगुल बजाया गया उसके बाद राजनीति में शामिल हो गए जहां उन्होंने देश के पहले कानून व न्याय मंत्री रहे जहां उन्होंने भारत के संविधान को 2 साल 11 महीना 18 दिन के बाद से विधान बनकर तैयार हुआ जहां संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को जैसा संविधान अपनाया जिससे संविधान की रचना के लिए उन्होंने अपना अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई डॉक्टर अंबेडकर साहब का मुख्य उद्देश्य की शिक्षा और आवश्यकताओं को फैलाना सामाजिक आंदोलन में देश में जातिवाद को समाप्त करना जिससे उन्हें दलितों महिलाओं के लिए कुछ लोगों का मसीहा के रूप में देखा जाता है जहां उनके व्यक्ति में स्वरों शब्द की प्रखरता बुद्धिमान जानवर स्वादिष्ट भव्य जिससे पूरे दुनिया में उन्हें उच्च नजर किया जाता है जहां लंबी व कारण बाबा साहेब की मृत्यु 6 दिसंबर 1956 दिल्ली में है बावजूद देश के अतुलनीय सेवाओं के लिए वर्ष 1990 में भारत से सम्मानित किया गया श्रद्धांजलि अर्पित करने में शिव शंकर एवं उनका पूरा परिवार मौजूद रहे।
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