कोरोना वायरस के चलते मजदूरों का पलायन - समाजसेवी अरुण कुमार
मजबूरी इंसान को कुछ भी करने को मजबूर कर देती है। देश में लॉक डाउन जारी है ऐसे में वो मजदूर जिनकी आजीविका दिहाड़ी पर निर्भर थी वो क्या करें। अब न तो उनके पास काम है न ही पेट पालने के लिए कोई और रास्ता इतना ही नहीं दूर गांव से शहरों में आकर बसे इन मजदूरों के पास कमरे का किराया देने के लिए भी पैसे नहीं हैं। अब जब सारे दरवाजे बंद हो गए तो फिर नज़र आया वापस घर का दरवाज़ा लेकिन जाएं भी तो कैसे ट्रांसपोर्ट भी बंद।
कुछ ऐसी ही परिस्थितियों से जूझ रहे मजदूर और उनका परिवार इस लॉक डाउन के पसरे सन्नाटे के बीच सड़कों पर चलते नज़र आते हैं।
ऐसे न जाने कितने परिवार है जो लॉक डाउन की मार झेल रहे हैं। इनके पास न तो रोजगार है और न ही घर पहुंचने का साधन ।
लॉक डाउन के कारण सभी कम्पनियों व फैक्ट्रियों के मालिकों ने अपने कर्मचारियों को घर वापस जाने का फरमान सुना दिया है लेकिन इन कर्मचारियों का अब क्या होगा ??
ये किसी ने नहीं सोचा। ऐसे में जिनके गांव व घर हजारों किमी. दूर में स्थित है और उनके घर वापसी के फरमान के बीच सैलरी का भी कुछ अता-पता नहीं हैं। अब आखिर बिना रोजगार के मजदूर कैसे अपने परिवार का पेट पालेगा ??
वही पलायन का सिलसिला सरकार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है अपने गांवो की ओर पलायन करने वाले ऐसे तमाम परिवार सरकार के लिए भी चिंता का विषय है। काम-धंधा बंद होने के कारण ये लोग गांव वापसी के लिए मजबूर हैं लेकिन लॉक डाउन के दौरान सड़कों पर पसरे सन्नाटे के बीच पलायन करने वाले इन परिवारों के कारण लॉक डाउन का मकसद भी खतरे में पड़ गया है क्योंकि लोगों को सुरक्षित रखने के मकसद से घर पर रहने के लिए लॉक डाउन का पालन किया जा रहा है तो वहीं मजबूरी के कारण ये परिवार कोरोना के संक्रमण के खतरे से अनजान घर वापसी के लिए प्रयासरत हैं।
लेकिन सड़कों पर अपने परिवारो को लेकर पैदल घर वापसी कर रहे इन मजदूरों की समस्या को कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने संज्ञान में भी लिया। वही हमारे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इन मजदूरों के लिए विशेष व्यवस्था करने का आदेश दिया हैं । साथ ही पुलिस को इन मजदूरों के खाने-पीने तथा सुरक्षा सहित कई उचित व्यवस्थाएं मुहैया कराने का आदेश भी दिया है।
अब देखना ये होगा कि दूसरे प्रदेशों से अपने गांवों की ओर पलायन कर मजदूरो तक कितनी सुविधाएं पहुँच पा रही हैं ??
*इस लेख में व्यक्त विचार समाजसेवी अरुण कुमार पटेल के निजी विचार*🖊️🖊️
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